60 हजार साल से अलग-थलग रहती है ये जनजाति, अमेरिकी को तीरों से मारा, फिर रेत में दफनाया
60 हजार साल से अलग-थलग रहती है ये जनजाति, अमेरिकी को तीरों से मारा, फिर रेत में दफनाया
22, Nov 2018,01:11 PM
tv100,

पुलिस ने चाऊ की हत्या के आरोप में सात लागों को गिरफ्तार किया है। लेकिन क्या आप इस जनजाति के बारे में जानते हैं? आज हम आपको इसी जनजाति के बारे में बताने जा रहे हैं- 


सैंटनलीज आदिवासियों की आबादी 2011 की जनगणना के मुताबिक 40 है और ये बाहरी दुनिया से किसी भी तरह का संपर्क नहीं रखते हैं. अगर कोई बाहरी व्यक्ति इनके क्षेत्र में प्रवेश करता है तो ये आदिवासी उस पर हमला कर देते हैं. अक्सर लोग स्थानीय लोगों तक पहुंचने की कोशिश करते हैं.  

 मछुआरे ने पुलिस को बताया, 16 नवंबर को जब अमेरिका नागरिक द्वीप पर पहुंचा तो उस पर तीरों की बौछार होने लगी. इसके बाद आदिवासी अमेरिकी नागरिक को घसीटकर बीच तक ले गए. अगली सुबह वे चाऊ का शरीर रेत में आधा दफनाते हुए नजर आए.

कहा जा रहा है कि चाऊ ने सैंटेनेलीज आदिवासियों के साथ दोस्ती करने की कोशिश की थी और उन्हें फुटबॉल, फिशिंग लाइन्स और मेडिकल किट जैसे तोहफे भी पेश किए थे.

एक सूत्र ने बताया, अमेरिकी नागरिक चाऊ ने 14 नवंबर को भी सैंटिनल द्वीप में जाने की कोशिश की थी लेकिन कामयाब नहीं हो पाया था. दो दिन बाद वह पूरी तैयारी के साथ वहां गया. उस पर तीरों से हमला हुआ लेकिन फिर भी वह रुका नहीं, चलता रहा. 

अधिकारियों ने शव की तलाश के लिए हेलिकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन किया. हालांकि, हेलिकॉप्टर द्वीप पर लैंड करने में नाकामयाब रहा क्योंकि लैंड करने से उन पर सैंटलीज आदिवासियों का हमला हो सकता था.

सीआईडी के एसपी दीपक यादव के मुताबिक यह आदिवासी समूह संवेदनशील हैं और इस इलाके में 60,000 साल से रह रहे हैं. इनसे संपर्क नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह संरक्षित समूह बाहरी दुनिया से संपर्क में आने पर रोग की चपेट में आ सकता है. 

पोर्ट ब्लेयर पहुंचकर मछुआरों ने एक स्थानीय प्रीचर एलेक्स को पूरा वाकया बताया जो चाऊ का दोस्त भी था. एलेक्स ने चाऊ के अमेरिका में रह रहे परिवार से संपर्क किया जिसके बाद परिवार ने मदद के लिए नई दिल्ली स्थित यूएस दूतावास से संपर्क किया.

सैंटनेलीज बाहरी दुनिया के लोगों को दुश्मन समझते हैं और नजदीक आने पर आक्रामक तौर पर हमला करते हैं. 2004 में सुनामी आने के बाद जब भारतीय वायु सेना इस द्वीप पर निगरानी के लिए पहुंची थी तो सेना के हेलिकॉप्टर पर भी आदिवासियों ने तीर चलाए थे.

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