जम्मू-कश्मीर -पल भर में बिखर गया महागठबंधन
जम्मू-कश्मीर -पल भर में बिखर गया महागठबंधन
22, Nov 2018,10:11 AM
tv100,

जम्मू-कश्मीर में बदलते समीकरणों के मद्देनजर जिस महागठबंधन ने आकार लिया था वह टिक नहीं पाया। गवर्नर द्वारा विधानसभा भंग किए जाने के फैसले के साथ ही नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी की नई दोस्ती भी टूट गई। अब विधानसभा चुनाव में दोनों दल एक बार फिर एक दूसरे के आमने - सामने होंगे। नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस की दोस्ती पुरानी है और इसे अगामी चुनाव में भी कायम रहने की संभावना है।

दरअसल भाजपा द्वारा सज्जाद लोन के नेतृत्व में सरकार बनाने की कोशिशों को विफल करने के लिए नेकां, कांग्रेस और पीडीपी मजबूरी में एक साथ आने को तैयार हुए थे। अब नेशनल कांफ्रेंस भी कहने लगी है कि कोई महागठबंधन अभी बना ही नहीं था।पीडीपी को अब अपना रास्ता अकेले तय करना पड़ेगा। 

नेकां और पीडीपी पारंपरिक प्रतिद्वंदी रहे हैं। दोनों दलों की सियासत का मूल आधार ही एक-दूसरे के विरोध पर टिका है। लिहाजा लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में इनकी राहें अलग-अलग होंगी। इसमें पीडीपी के मुजफ्फर हुसैन बेग से लेकर इमरान रजा अंसारी तक शामिल होकर नेकां और पीडीपी के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं।

इस मोर्चे में नेकां और पीडीपी दोनों दलों के असंतुष्टों के लिए जगह तय है। श्रीनगर में मेयर के चुनाव में इस मोर्चे को सफलता मिल चुकी है। नेकां से अलग हुए जुनैद मट्टू को इस मोर्चे ने मेयर बनवा दिया। भाजपा इस मोर्चे के सहारे नई सरकार बनाने का सपना संजोए है। कश्मीर की सियासत में भाजपा ने अपना नया साथी जरूर ढ़ूंढ़ लिया है। सज्जाद लोन के नेतृत्व में तीसरा मोर्चा उभरकर सामने आया है।

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