भारत-रूस रिश्तों के मायने
भारत-रूस रिश्तों के मायने
06, Oct 2018,04:10 PM
Edited By Aarti Singh,

रूस और भारत की दोस्ती 70 साल पुरानी है। 70 सालों में अंतरराष्ट्रीय परिदर्श्य बदल गए। कई देश युद्ध की आग में झुलस गए। लेकिन भारत और रूस के रिश्तों पर आंच तक नहीं आई। नतीजतन ये दोस्ती आज भी दुनिया में एक मिसाल के तौर पर बरकरार है। रुस ने हमेशा सच्चा साथी बनकर भारत का साथ दिया है। आज जब भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित कर लिया है। अमेरिका से भी भारत के संबंध प्रगाढ चढ रहे हैं। बावजूद इसके रूस के साथ भी उसकी मित्रता कायम है। जो कही न कहीं इस बात का संकेत है कि भारत ने नए दोस्त जरूर बनाए हैं पर पुराने संबंध भी उन्हीं मायनों के साथ कायम हैं। रूस के राष्ट्रपति दो दिवसीय भारत दौरे पर आए थे। जिसमें भारत और रूस के बीच रक्षा समेत 20 अहम करार हुए हैं। आइए जानते हैं कि आखिर किन वजहों से अहम रहा है भारत-रूस रिश्ता-

कश्मीर मसले पर किया वीटो का इस्तेमाल-

1962 में कश्मीर को भारत से अलग करने के मकसद से पश्चिमी देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया था। जिसका अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन और वेनिजुएला ने समर्थन किया था। लेकिन रूस ने अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल करके प्रस्ताव को पास नहीं होने दिया था।

अंतरिक्ष और सैन्य सहयोग

रूस ने अंतरिक्ष और परमाणु कार्यक्रम में भी भारत की लगातार मदद करता रहा है। भारत ने साल 1975 में पहला सैटेलाइट आर्यभट्ट लांच किया था, जिसको रूस की ही मदद से तैयार किया गया था। साल 1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा रूस के सोयूज टी-11 स्पेश शटल से अंतरिक्ष गए थे। इसके साथ ही वह अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय बने। सैन्य सुरक्षा की बात करें तो भारत-रूस की सेनाओं के बीच हमेशा सैन्य अभ्यास होते रहते हैं। भारत ने रूस की सहायता ब्रह्मोस मिसाइल बनाई। रूस ने भारत के साथ अपनी सैन्य तकनीक साझा करता है। भारत ने रूस से कई हथियार भी खरीदें हैं। आतंकवाद के मुद्दे पर भी रूस और भारत एक साथ नजर आते हैं।

औद्योगीकरण में अहम भूमिका
भारत के औद्योगिकरण में रूस ने अहम भूमिका निभाई है। बोकारो, भिलाई और विशाखापत्तनम स्थित कारखाने, भाखड़ा-नंगल पनबिजली बांध, दुर्गापुर संयंत्र, नेयवेली में थर्मल पॉवर स्टेशन, कोरबा में विद्युत उपक्रम, ऋषिकेश में एंटीबायोटिक्स प्लांट और हैदराबाद फार्मास्यूटिकल प्लांट की स्थापना में रूस ने भारत की मदद की है। मुंबई स्थित भारतीय औद्योगिक संस्थान, देहरादून और अहमदाबाद में रिसर्च इंस्टीट्यूट्स ऑफ पेट्रोलियम इंडस्ट्री की स्थापना में भी रूस ने सहायता की।

विघटन के बाद भी नहीं बदला रूस
1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया। बावजूद इसके भारत के परंपरागत दोस्त रूस का रूख भारत की तरफ शालीन ही रहा। पिछले 70 सालों में रूस को तमाम उतार-चढ़ाव से गुजरना पड़ा, दोनों देशों में सरकारें बदली और हालात बदले, लेकिन दोस्ती का सिलसिला कभी नहीं थमा।

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