जाने किन फैसलों ने बनाया इंदिरा गांधी को आयरन लेडी...
जाने किन फैसलों ने बनायारा इंदिगां आयरन लेधी कोडी...
31, Oct 2018,02:10 PM
TV100,

भारत की पूर्व प्रधानमंत्री और पहली महिला प्रधानमंत्री की आज 31वीं पूण्यतिथी है। कठोर इरादे और उदार व्यक्तित्व वाली शख्सियत रखने वाली इंदिरा ने आजाद भारत के उस सपने को अमली जामा पहनाया जो कभी उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने देखा था।

भारत की आयन लेडी कहे जाने वाली इंदिरा ने भारत का इतिहास तो गढा ही साथ ही उन्होनें पूर्वी पाकिस्तान को आजाद करा कर पूरे ऐशिया का भूगोल भी बदल दिय़ा।

आइए जानते हैं आयरन लेडी के उन अहम फैसलों के बारे में जिसने आजाद भारत के सिमटते अस्तित्व को दुनिया में बुलंद वजूद के साथ संवारा...

 बैंकों का राष्ट्रीयकरण : 1969 में इंदिरा गांधी ने देश के 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इंदिरा गांधी का कहना था कि बैंकों के राष्ट्रीयकरण की बदौलत ही देश भर में बैंक क्रेडिट दी जा सकेगी। 19 जुलाई 1969 को एक अध्यादेश लाया गया और 14 बैंकों का स्वामित्व राज्य के हवाले कर दिया गया। देश भर के ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक की शाखाएं खुल गईं। इंदिरा के इस कदम ने भारत की डूबती अर्थव्यवस्था को मजबूती के साथ उबारा।

प्रिवीपर्स की समाप्ति : इंदिरा गांधी ने सारे राजा- महाराजाओं की प्रिवीपर्स को भी समाप्त कर दिया। 23 जून 1967 को ऑल इंडिया कांग्रेस ने प्रिवीपर्स की समाप्ति का प्रस्ताव पारित कर दिया।

इस अध्यादेश को सुप्रीमकोर्ट में सफलतापूर्वक चुनौती भी दी गई। लेकिन 1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार में आईं। जिसके बाद उन्होंने संविधान में संशोधन कराया और प्रिवीपर्स की समाप्ति कर दी।

 

पूर्वी पाकिस्तान का उदय: विभाजन के बाद पूर्वी पाकिस्तान की जनता पाकिस्तान की सेना के शासन से त्रस्त हो चुकी थी। उनके पास नागरिक अधिकार नहीं थे। शेख मुजीबुर्रहमान की अगुआई में मुक्ति वाहिनी का गठन हआ। जिसके चलते पाकिस्तान की सेना से गृहयुद्ध शुरू कर हो गया। नतीजतन भारत के असम में बांगला शरणार्थी बङी तादाद में आना शुरू हो गए। जिनके कारण देश में आंतरिक और आर्थिक संकट पैदा हो गया। 1971 को दूसरा भारत-पाकिस्तान युद्ध शुरू हुआ। हारने की दशा में पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र से मदद की गुहार लगाई। लेकिन अमेरिकी बेङा आने के पहले ही भारताय सेना ने पूर्वी पाकिस्तान को पाकिस्तान से आजाद करा लिया जिसके तुरंत बाद ही प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पर बागंलादेश के निर्माण की औपचारिक घोषणा कर दी।

जब देश में लगा आपातकाल:1975 में रायबरेली के चुनाव में गड़बड़ी के आरोप और जेपी द्वारा संपूर्ण क्रांति के नारे के चलते समूचे विपक्ष ने एकजुट होकर इंदिरा सरकार के खिलाफ संघर्ष छेड़ दिया। जिसे बाद इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर दी। आपातकाल में नागरिक अधिकार रद्द हो गए। प्रेस और मीडिया पर सेंसरशिप लगा दी गई। कई विपक्षी नेता जेल भी भेजे गए। इंदिरा के इस निर्णय ने एक रात में समूचे देश की तस्वीर बदल डाली। जनता में आक्रोस का भाव बढने लगा। नतीजतन 1977 के लोकसभा चुनावों में इंदिरा को करारी शिकस्त का सामना करना पङा।

लेकिन विपक्ष की एकजुटता वाली यह पार्टी ज्यादा दिन तक सत्ता में काबिज ना रह सकी। इंदिरा की ये हार महज एक पङाव साबित हुई और कांग्रेस एक बार फिर प्रंचड जनादेश के साथ सत्ता में आई।

ये भी पढ़ें :

दंतेवाड़ा : मौत सामने देख कैमरा मैन ने याद किया माँ को बनाया ये वीडियो

खबरें