कृष्णानंद राय हत्याकांड: AK-47 से 400 राउंड गोलियां चलीं,कातिल कोई नहीं
कृष्णानंद राय हत्याकांड: AK-47 से 400 राउंड गोलियां चलीं,कातिल कोई नहीं
04, Jul 2019,10:07 AM
TV100,

दिल्ली की सीबीआई अदालत ने बुधवार को बीजेपी के तत्कालीन विधायक कृष्‍णानंद राय और उनके छह साथियों की हत्या मामले में बाहुबली विधायक मुख़्तार अंसारी, उनके सांसद भाई अफजाल अंसारी समेत अन्य सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया. करीब 14 साल बाद आए इस फैसले के बाद  सवाल उठाना लाजमी है कि एके47 से 400 राउंड गोलियां चलीं, सात लोग मारे गए और कातिल कोई भी नहीं निकला! इस फैसले से कृष्णानंद राय हत्याकांड का राज भी दफ़न हो गया

पुलिस और सीबीआई ने इस मामले में अंसारी बंधुओं के अलावा संजीव माहेश्वरी जीवा, मुन्ना बजरंगी, एजाज, अता उर रहमान, फिरदौस, राकेश पाण्डेय, रामू मल्लाह, विश्वास नेपाली, जफर, अफरोज खान और मंसूर अंसारी के खिलाफ छह अलग-अलग चार्जशीट दायर की थीं. फिरदौस की ट्रायल के दौरान ही मौत हो गई. मुन्ना बजरंगी की नौ जुलाई, 2018 को बागपत जेल में हत्या कर दी गई. विश्वास नेपाली और जफर आज तक पकड़े नहीं गए हैं, जबकि अफरोज उर्फ चुन्नू पहलवान के खिलाफ यह केस बंद किया जा चुका है

29 नवंबर 2005 की तारीख गाजीपुर के इतिहास में काला अध्याय की तरह है. इसी दिन मोहम्मदाबाद से बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय और उनके छह साथियों को गोलियों से छलनी कर दिया गया था. हमलावरों ने एके-47 से 400 राउंड गोलियां चलाई थीं. सातों शवों से 67 गोलियां निकली गई थीं. इस मामले में सात लोगों पर 14 साल तक मुकदमा चला, लेकिन कातिल कोई नहीं निकला. अब सवाल यह उठ रहा है कि हत्या किसने की या करवाई

मामले में फैसला सुनाते हुए स्पेशल जज अरुण भारद्वाज ने हत्याकांड को भयानक करार दिया. उन्होंने फैसले में लिखा कि इस केस की जांच यूपी पुलिस से लेकर सीबीआई को दी गई थी. कृष्णानंद की पत्नी अलका राय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में केस गाजीपुर से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया था, लेकिन दुर्भाग्य से गवाहों के मुकर जाने से यह मामला भी अभियोजन की नाकामी का उदाहरण बन गया. यदि गवाहों को ट्रायल के दौरान विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम, 2018 का लाभ मिलता तो नतीजा कुछ और हो सकता था

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