राफेल सौदे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू
राफेल सौदे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू
14, Mar 2019,03:03 PM
tv100,

केंद्र सरकार ने गुरुवार को राफेल लड़ाकू विमानों से संबंधित दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा किया और उच्चतम न्यायालय से कहा कि संबंधित विभाग की अनुमति के बगैर कोई भी इन्हें पेश नहीं कर सकता।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ के समक्ष केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अपने दावे के समर्थन में साक्ष्य कानून की धारा 123 और सूचना के अधिकार कानून के प्रावधानों का हवाला दिया।

यह पीठ राफेल विमान सौदे के मामले में अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिये दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। ये पुनर्विचार याचिका पूर्व केंद्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी तथा अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दायर कर रखी हैं।

सरकार की तरफ से अदालत में पेश हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालत से कहा कि वह लीक दस्तावेजों को पुनर्विचार याचिका से हटा दे क्योंकि सरकार इन दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा करती है। इसके जवाब में अदालत ने पूछा कि आप किस तरह के विशेषाधिकार का दावा कर रहे हैं? वे उन्हें पहले ही अदालत में पेश कर चुके हैं। यह दस्तावेज पहले से ही सार्वजनिक हो चुके हैं।

जिसके जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि उन्होंने इसे चुराकर अदालत में पेश किया है। राज्य के दस्तावेजों को बिना स्पष्ट अनुमति के प्रकाशित नहीं किया जा सकता है। अटार्नी जनरल ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि साक्ष्य अधिनियम के प्रावधानों के तहत कोई भी संबंधित विभाग की अनुमति के बिना अदालत में गोपनीय दस्तावेज पेश नहीं कर सकता। 

जिसपर न्यायालय ने आरटीआई की धारा 22 और 24 का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां तक कि खुफिया एजेंसी और सुरक्षा प्रतिष्ठान भी भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के उल्लंघन के बारे में जानकारी देने के लिए बाध्य हैं। राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है।

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