राम मंदिर: बाबरी के पक्षकार इकबाल अंसारी बोले, गैर विवादित जमीन वापस देने पर कोई एतराज नहीं
राम मंदिर: बाबरी के पक्षकार इकबाल अंसारी बोले, गैर विवादित जमीन वापस देने पर कोई एतराज नहीं
29, Jan 2019,03:01 PM
TV100,

केंद्र सरकार द्वारा राम मंदिर के लिए सुप्रीम कोर्ट में गैर विवादित जमीन वापस दिए जाने के लिए दी गई याचिका पर बाबरी के पक्षकार इकबाल अंसारी का कहना है कि हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है। 2.77 एकड़ पर ही थी मस्जिद, उसी पर विवाद है। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि चुनाव आते ही अयोध्या मुद्दे को लेकर सरगर्मियां शुरू हो जाती हैं। सरकार राम मंदिर पर केवल राजनीति कर रही है। विकास और रोजगार के मुद्दे पर चर्चा नहीं हो रही है।
केंद्र सरकार ने अयोध्या में विवादास्पद राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद स्थल के पास अधिग्रहण की गई 67 एकड़ जमीन को उसके मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति मांगने के लिये मंगलवार को कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जिससे इस मुद्दे पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।

वहीं, रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का कहना है कि विवाद केवल 2.77 एकड़ जमीन का है। बाकी जमीन सरकार ले सकती है लेकिन जब तक 2.77 एकड़ का मामला नहीं निपट जाता राम मंदिर नहीं बन पाएगा।
मुस्लिम पैरोकार हाजी महबूब का कहना है कि भाजपा अपनी छवि बचाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर रही है। भाजपा के लोग राम मंदिर मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। मुसलमानों व देश के साथ गलत हो रहा है। जब सारी जमीन का अधिग्रहण हुआ था तो इस याचिका का क्या मतलब? जिसके पक्ष में कोर्ट निर्णय दे उसी को सारी जमीन वापस दे दी जाए।

केंद्र सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले पर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली का कहना है कि इस तरह के मुद्दे उठाकर केंद्र सरकार प्रमुख मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाना चाहती है। जिसे गैरविवादित जमीन बताया जा रहा है उस पर कोर्ट ने स्टे लगा दिया है। यहां कोई निर्माण नहीं हो सकता। जब तक फैसला न आए किसी को निर्माण की इजाजत न दी जाए।

शिया धर्म गुरू मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि जब तक पूरे मामले पर फैसला न हो जाए तब तक किसी भी निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। केंद्र सरकार ने चुनाव को देखते हुए कोर्ट में याचिका दी है। भाजपा विकास के मुद्दे पर 2019 का चुनाव नहीं लड़ना चाहती है।

इन सबसे अलग शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि जो विवादित जमीन है वह बहुत थोड़ी सी है। ऐसे में गैरविवादित जमीन अगर छोड़ दी जाती है तो यहां जब तक राम मंदिर निर्माण शुरू होगा तब तक विवादित जमीन का भी निर्णय आ जाएगा।

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