Birthday Special : राजकपूर नर्गिस से करना चाहते थे शादी, लेकिन कुछ मतभेद चलते नर्गिस ने छोड़ा था साथ
Birthday Special : राजकपूर नर्गिस से करना चाहते थे शादी, लेकिन कुछ मतभेद चलते नर्गिस ने छोड़ा था साथ
14, Dec 2018,01:12 PM
Edited BY: Aarti Singh,

महज 10 साल की उम्र में ही अपना फ़िल्मी सफर शुरू करने वाले लीजेंड एक्टर, राइटर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर राजकपूर की आज बर्थ एनिवर्सरी है। हिंदी सिनेमा के महशूर दिग्गज व शोमैन के नाम से जाने जाने वाले राजकपूर जिंदगी के बहुत उतार चड़ाव से गुजरे है, फिल्मी जगत का साथ उन्होने अपने जिन्दगी के आखिरी सफर तक दिया है जबतक उनकी सांसे चली तब तक वो फिल्मों से जुडे रहे ।

कैसा था उनके जीवन के सफऱ

14 दिसंबर 1924 को पेशावर (पाकिस्तान) में पैदा हुए राजकपूर के पिता पृथ्वी राज कपूर एक जाने माने थियेटर और फ़िल्म कलाकार थे। ज़ाहिर है अभिनय राज कपूर के खून में है। राज तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके दोनों भाई शशि कपूर और शम्मी कपूर भी अपने दौर के दिग्गज अभिनेता रहे हैं। राज कपूर का पूरा नाम 'रणबीर राज कपूर' था। रणबीर अब उनके पोते यानी ऋषि कपूर-नीतू सिंह के बेटे का नाम है।

एक 'अनाड़ी', एक 'आवारा', एक 'छलिया' से शोमैन बनने तक का सफर आसान नहीं था। पिता पृथ्वीराज कपूर चाहते तो राजकपूर को कहीं भी आसानी से ब्रेक मिल सकता था। पर, उन्होंने राज को अपने दम पे कुछ करने की नसीहत दी। बाद में राज कपूर ने इंडस्ट्री में अपने करियर की शुरुआत एक क्लैपर ब्वॉय के तौर पर की थी। यह फ़िल्म केदार शर्मा डायरेक्ट कर रहे थे। शूटिंग चल ही रही थी कि एक बार केदार शर्मा ने राज कपूर को जोरदार थप्पड़ लगाया। हुआ यह था कि राज सीन के वक्त हीरो के इतने करीब आ गए थे कि क्लैप देते ही हीरो की दाढ़ी क्लैप में फंस गई थी।

24 साल की उम्र में बने डायरेक्टर

राज कपूर ने 24 साल की उम्र में अपना प्रोडक्शन स्टूडियो 'आर के फ़िल्म्स' शुरू किया और इंडस्ट्री के सबसे यंग डायरेक्टर बन गए। उनके प्रोडक्शन की पहली फ़िल्म थी 'आग'। इस फ़िल्म में वो डायरेक्टर और एक्टर दोनों ही की भूमिका में थे। नर्गिस से रहा गहरा रिश्ता राज कपूर और नर्गिस 1940-1960 के दशक की बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत और पॉपुलर जोड़ियों में से एक है। ये दोनों स्टार्स सिर्फ़ बड़े पर्दे पर ही नहीं असल जीवन में भी साथ थे। नर्गिस ने राजकपूर के साथ कुल 16 फ़िल्में की, जिनमें से 6 फ़िल्में आर.के.बैनर की ही थी। इस बीच दोनों में नजदीकियां भी बढ़ने लगीं और दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया और दोनों ने शादी करने का मन भी बना लिया। राजकपूर जब 1954 में मॉस्को गए तो अपने साथ नर्गिस को भी ले गए। कहते हैं यहीं दोनों के बीच कुछ मतभेद हुए और दोनों के बीच इगो की तकरार इतनी बढ़ी कि वह यात्रा अधूरी छोड़कर नर्गिस इंडिया लौट आईं। 1956 में आई फ़िल्म 'चोरी चोरी' नर्गिस और राजकपूर की जोड़ी वाली अंतिम फ़िल्म थी

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