अंतरिक्ष से भी दिखाई दे रही है स्टैच्यू ऑफ यूनिटी अमेरिका ने जारी की तस्वीर
अंतरिक्ष से भी दिखाई दे रही है स्टैच्यू ऑफ यूनिटी अमेरिका ने जारी की तस्वीर
17, Nov 2018,05:11 PM
tv100,

हाल ही में गुजरात में सरदार पटेल की प्रतिमा बनाई गई है। यह देश की नहीं बल्कि दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है। इस प्रतिमा को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का नाम दिया गया है। इसकी ऊंचाई इतनी है कि इसे अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है। अमेरिका के सैटेलाइट नेटवर्क ने शुक्रवार को इस प्रतिमा की अंतरिक्ष से ली गई तस्वीर ट्वीट की हैं। यह तस्वीर 15 नवंबर को खींची गई थी। गुजरात के अहमदाबाद में नर्मदा नदी के किनारे बनी यह प्रतिमा 182 मीटर यानी 597 फीट की है। पीएम मोदी ने ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का 31 अक्टूबर को अनावरण किया था। इससे पहले 17 किलोमीटर लंबी फूलों की घाटी का उद्घाटन किया। साथ ही उन्होंने प्रतिमा के पास पर्यटकों के लिए तंबुओं के शहर और पटेल के जीवन पर आधारित संग्रहालय का भी लोकार्पण किया। प्रतिमा के भीतर 135 मीटर की ऊंचाई पर गैलरी बनाई गयी है, जिससे पर्यटक बांध और पास की पर्वत शृंखला का दीदार कर सकेंगे।  

बता दें कि सरदार पटेल की इस प्रतिमा की ऊंचाई स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से दोगुनी है। प्रतिमा की निर्माण का सरदार सरोवर बांध के पास साधु बेट पर किया गया गया है। 

70,000 टन सीमेंट लगा

मूर्ति के निर्माण में 70,000 टन सीमेंट, 18,500 टन मजबूत लोहा, 6,000 टन स्टील और 1,700 मीट्रिक टन कांसे का प्रयोग किया गया है।

यूपी से गुजरात आई एकता यात्रा ट्रेन

बता दें कि गुजरात के सरदार सरोवर बांध के पास लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए देशभर से लोग गुजरात पहुंचे थे। उत्तर प्रदेश से लोगों को गुजरात ले जाने के लिए विशेष ट्रेन मंगलवार को वाराणसी से रवाना हुई थी।


विश्व के इस सबसे ऊंची (182 मीटर) प्रतिमा को दो देशी कंपनियों ने बनाया है। इस प्रतिमा को बनाने के लिए करीब 2979 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें से अधिकांश पैसा गुजरात सरकार ने दिया है। हालांकि केंद्र सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए मदद दी थी।

गुजरात सरकार ने इसके लिए एक ट्रस्ट का गठन भी किया था। सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट के जिम्मे ही पूरी निर्माण प्रक्रिया थी। देश की दिग्गज इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुर्बो (एलएंडटी) और सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के 250 इंजीनियर और 3400 मजदूरों ने मिलकर 3 साल 9 महीने में इस प्रतिमा को तैयार किया। 

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