मोदी शहरी नक्सलियों के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं, आदिवासियों के बच्चों को थमा रहे बंदूक
मोदी शहरी नक्सलियों के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं, आदिवासियों के बच्चों को थमा रहे बंदूक
09, Nov 2018,05:11 PM
tv100,

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव (2018) के मद्देनजर जगदलपुर  की रैली में पीएम नरेंद्र मोदी  ने कहा भाई दूज के त्योहार में मैं आपसे कुछ मांगने आया हूं. उन्होंने कहा कि मैं विकास की योजना लेकर आया हूं. मैं बस्तर कभी खाली हाथ नहीं आया. प्रधानमंत्री ने शहरी नक्सल का मुद्दा यहां भी उठाया. उन्होंने कहा कि शहरी नक्सलियों के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं, मगर वे आदिवासियों की जिंदगी तबाह कर रहे हैं. जिन बच्चों के हाथ में कलम होनी चाहिए, राक्षसी मनोवृत्ति के लोग उनके हाथ में बन्दूक पकड़ा देते हैं. अर्बन माओवादी लोग खुद ऐश की जिन्दगी जीते हैं और आदिवासी बच्चों की जिन्दगी तबाह करते हैं और कांग्रेस के लोग ऐसे अर्बन माओवादी लोगों को बचाने के लिए मैदान में उतर आते हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जमीन से कटे और चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए नेता आदिवासियों की समस्याओं को समझ नहीं पाए. 


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पैसा पहले भी था, सरकारें पहले भी थीं. मगर बिचौलियों की भेंट चढ़ जाता था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारा एक ही मंत्र है, सबका साथ-सबका विकास. हमारी सरकार को आपकी चिंता है. पीएम मोदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सिर्फ कमल ही खिलना चाहिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मुझे अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को पूरा करना है, इसलिए बार-बार बस्तर आया हूं. आज भी इसीलिए बस्तर आया हूं. उन्होंने कहा कि हमें मिलकर बस्तर का भाग्य बदलना है. 


मैं बस्तर के लोगों से कांग्रेस के नेताओं को एक उचित सबक सिखाने का आग्रह करता हूं, जो एक तरफ शहरी नक्सलियों को सुरक्षा मुहैया कराने की कोशिश करते हैं और दूसरी ओर छत्तीसगढ़ में राज्य को नक्सलियों से मुक्त करने की बात करते हैं. 


शहरी माओवादी एसी में रहते हैं, बड़ी कारों में घूमते हैं और उनके बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं, लेकिन वे रिमोट कंट्रोल के माध्यम से यहां हमारे गरीब आदिवासी युवाओं के जीवन को बर्बाद कर देते हैं. कांग्रेस इन शहरी माओवादी का समर्थन क्यों कर रही है?चार साल में 30 हजार किलोमीटर की सड़कें बनाईं. 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों डीडी न्यूज के कैमरामैन अच्युतानंद साहू के नक्सली हमले में मौत पर भी माओवादियों और कांग्रेस को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि वह बंदूक लेकर नहीं आया था, वह कंधे पर कैमरा लेकर नहीं आया था. उसे मार दिया गया. अभी दो दिन पहले भी नक्सल हमले में जवान मारे गए. ये माओवादी निर्बलों की हत्या करें और कांग्रेस उन्हें क्रांतिकारी कहे. क्या कांग्रेस की इस बात का आप समर्थन कर रहे हैं. एक निर्दोष पत्रकार को जिन्होंने मौत के घाट उतार दिया, आपको वे क्रांतिकारी लगने लगे हैं.

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