अयोध्या विवाद पर सुनवाई की तारिख अब 14 मार्च
अयोध्या विवाद पर सुनवाई की तारिख अब 14 मार्च
09, Feb 2018,05:02 PM
, Uttar pradesh

एक बार फिर से विवादीत राम मंदिर चर्चा का सबब बना हुआ है....सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर सुनवाई की तारिख बढा कर 14 मार्च कर दी है...अपको बता दे की आयोध्या विवाद पर 8 को सुनवाई होनी थी लेकिन कुछ दस्तावेजो के ट्रांसलेशन न हो पाने के चलते तारिख बढा दी गई है....वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामचरित मानस, रामायण और गीता पुरानो का

इंग्लिश में ट्रांसलेट करके दो हफ्ते के अन्दर ही कॉपी मांगी है..हाल ही में कोर्ट ने कहा था  11 अगस्त को 7 लैंग्वेज के डॉक्युमेंट्स का ट्रांसलेशन करवाने को कहा था। 6 दिसंबर को सुनवाई तय की थी, लेकिन उस वक्त तक ट्रांसलेशन का काम पूरा नहीं हो पाया था, इसलिए कोर्ट ने तारीख 8 फरवरी तक बढ़ा दी थी। तब कुल 19,590 पेज में से सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के हिस्से के 3,260 पेज जमा नहीं हुए थे।

सामान्य रूप से चलेगी सुनवाई

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, एक पक्षकार ने इस केस की रोजाना सुनवाई की मांग की। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे पास 700 गरीबों के केस हैं, वे न्यायइन्हें दो हफ्ते में पेश करना हैफिर एक बार 14 मार्च तक टल गई। दरअसल, कुछ दस्तावेजों का ट्रांसलेशन नहीं हो पाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पक्षकार रहे लोगों से वहां पेश किए गए दस्तावेज और रामचरित मानस, रामायण और गीता समेत कुछ किताबों की इंग्लिश में ट्रांसलेट की गई कॉपी मांगी है। इन्हें दो हफ्ते में पेश करना है। बता दें कि कोर्ट ने 11 अगस्त को 7 लैंग्वेज के डॉक्युमेंट्स का ट्रांसलेशन करवाने को कहा था। 6 दिसंबर को सुनवाई तय की थी, लेकिन उस वक्त तक ट्रांसलेशन का काम पूरा नहीं हो पाया था, इसलिए कोर्ट ने तारीख 8 फरवरी तक बढ़ा दी थी। तब कुल 19,590 पेज में से सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के हिस्से के 3,260 पेज जमा नहीं हुए थे।

सामान्य रूप से चलेगी सुनवाई

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, एक पक्षकार ने इस केस की रोजाना सुनवाई की मांग की। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे पास 700 गरीबों के केस हैं, वे न्याय की गुहार लगा रहे हैं। हमें इस केस की भी चिंता है और एक बार यह शुरू हो जाएगा तो सामान्य रूप से चलेगा।

पहले मुख्य पक्षकारों की दलीलें सुनी जाएंगी

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबसे पहले मुख्‍य पक्षकारों की दलीलें सुनी जाएंगी, बाद में बाकी पिटीशंस पर सुनवाई होगी।

अयोध्या मामले में तीन पक्षकार
1. सुुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड 
2. राम लला विराजमान 
3. निर्मोही अखाड़ा

- इन तीन मुख्य पक्षकारों के अलावा एक दर्जन अन्य पक्षकार भी हैं। 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में कारसेवकों ने विवादित बाबरी ढांचे को ढहा दिया था।

कोर्ट ने कहा- यह सिर्फ जमीन विवाद है

- सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि यह केस सिर्फ जमीन विवाद के तौर पर देखा जाएगा। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि भावनात्मक और राजनीतिक दलीलें नहीं सुनी जाएंगी। यह सिर्फ कानूनी मामला है।

लोकसभा चुनाव तक सुनवाई टालने की अपील की गई थी

- पिछली सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से इस केस की सुनवाई लोकसभा चुनाव तक टालने की मांग की थी।

- उन्होंने कहा, "कृपया होने वाले असर को ध्यान में रखकर इस मामले की सुनवाई कीजिए। कृपया इसकी सुनवाई जुलाई 2019 में की जाए, हम यकीन दिलाते हैं कि हम किसी भी तरह से इसे और आगे नहीं बढ़ने देंगे। केवल न्याय ही नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा दिखना भी चाहिए।"

- इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "ये किस तरह की पेशकश है?आप कह रहे हैं जुलाई 2019। क्या इससे पहले मामले की सुनवाई नहीं हो सकती?"

पक्षकारों को 50 सुनवाई में फैसला आने की उम्मीद

- राम मंदिर के समर्थन में आए पक्षकारों का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 90 सुनवाई में ही फैसला दे दिया था। पक्षकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट 50 सुनवाई में फैसला दे सकता है।

- हालांकि बाबरी मस्जिद से जुड़े पक्षकार ऐसा नहीं मानते। उनका कहना है कि केस में दस्तावेजों का अंबार हैं, उन सभी पर प्वाइंट टू प्वाइंट दलीलें रखी जाएंगी। हिंदू महासभा के वकील विष्णु शंकर जैन नेे बताया कि केस में 7 भाषाओं हिंदी, उर्दू, पाली, संस्कृत, अरबी आदि के ट्रांसलेटेड डॉक्युमेंट्स जमा हो चुके हैं।

HC ने विवादित जमीन 3 हिस्सों बांटने का दिया था ऑर्डर

- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में विवादित 2.77 एकड़ जमीन 3 बराबर हिस्सों में बांटने का ऑर्डर दिया था। अदालत ने रामलला की मूर्ति वाली जगह रामलला विराजमान को दी। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को और बाकी हिस्सा मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया था।

शिया बोर्ड का कौन सा प्रपोजल SC रिकॉर्ड में आया?

 मुस्लिमों के एक गुट ने उत्तर प्रदेश के शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के बैनर तले कोर्ट में एक मसौदा पेश किया था। इस मसौदे के मुताबिक, विवादित जगह पर राम मंदिर बनाया जाए और मस्जिद लखनऊ में बनाई जाए। इस मस्जिद का नाम राजा या शासक के नाम पर रखने के बजाए मस्जिद-ए-अमन रखा जाए।

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